रामस्वरूप रावतसरे की रिपोर्ट

  • शशि थरूर समेत 350 स्पीकर होंगे शामिल

जयपुर। पिंकसिटी के होटल क्लार्क्स आमेर में जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के 16वें संस्करण का आगाज हो गया है। 19 से 23 जनवरी तक चलने वाले इस अनूठे महाकुंभ में साहित्य, संगीत, कला से जुड़े साहित्यकार संगीतकार और फिल्म से जुड़े 350 स्पीकर्स शामिल हो रहे है। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में इस बार कला, साहित्य संगीत के साथ वैश्विक मुद्दों को लेकर चिंतन और मंथन किया जा रहा है। इस बार जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का आयोजन उत्सव थीम पर किया जा रहा है। ऐसे में होटल क्लार्क्स आमेर को राजस्थानी रंगों और कलाकृतियों से सजाया गया है।

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के 16 वें संस्करण के पहले दिन सांसद शशि थरूर विचार व्यक्त करते हुए

गुरुवार को शास्त्रीय गायिका सुषमा सोम और पुष्कर के नाथू लाल सोलंकी की प्रस्तुति से जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की रंगारंग शुरुवात हुई। उद्घाटन सत्र में नोबेल पुरुस्कार विजेता अब्दुल रज्जाक गुरनाह ने कहा कि लेखन एक अनूठी परम्पर है। जिसे कायम रखना चाहिए। फेस्टिवल की फाउंडर नमिता गोखले ने कहा कि पिछले साल हमने यंगस्टर्स को मिस किया। इस बार वापिस इन्हे देखकर अच्छा लग रहा है। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के प्रोड्यूसर संजोय रॉय ने बताया कि इस बार ग्रीन कांसेप्ट पर फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें किसी तरह के कार्ड की जरूरत नहीं होगी। फेस्टिवल में शामिल होने वाले लोग ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बाद सिर्फ अपना बारकोड दिखाकर फेस्टिवल में शामिल हो सकेंगे। जहां उन्हें साहित्य कला संगीत से जुड़े मुद्दों पर चिंतन और मंथन के साथ ही रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने को मिलेंगे। जहां उनके लिए लजीज व्यंजनों की व्यवस्था भी की गई है।

उद्घाटन सत्र में नोबेल पुरुस्कार विजेता अब्दुल रज्जाक गुरनाह, फेस्टिवल की फाउंडर और साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता नमिता गोखले और जेएलएफ के को-फाउंडर विलियम डालरीमले और संजोए रॉय मौजूद रहे।

उद्घाटन समारोह में नॉबेल पुरस्कार विजेता अब्दुल रज्जाक गुरनाह ने कहा कि निग्लेट करने का हम पर रेजिस्ट्रेंस (प्रतिरोध) है, पूरे तरीके से काम करने के लिए रेजिस्ट्रेंस नहीं होनी चाहिए। इसी क्रम में नॉबेलिटी और ब्रेवरी भी आती है। प्रतिरोध करने का एक तरीका लिखना भी है, ऐसे में हमने लिखते रहना चाहिए। डिस्ट्रेक्शन में भी रेजिस्ट्रेंस होना चाहिए। रोजमर्रा के जो काम, जिन्हें हम भूलते जाते है। यानी हमें यह देखना चाहिए जो महत्वपूर्ण है, वहीं हमें जीवित रखे हुए है। इसलिए लेखन जारी रहना चाहिए। कई बार ऐसी भी चीजें होती है, जिनसे हम विचलित होते है और कई बार उनसे आकर्षण होता है, लेकिन यह भी एक तरीके का रेजिस्ट्रेंस है।

जेएलएफ के दौरान बैठक में हुए ब्रह्मापुराण सत्र में साहित्यकार बिबेक देबरॉय ने जेएनयू के रिटायर्ड प्रोफेसर पुष्पेश पंत के साथ चर्चा की। इस सत्र में देबरॉय ने कहा कि हमारे पुराण ज्ञान का विश्वकोष है। 18 महापुराणो में विश्व का समूचा ज्ञान भरा पड़ा है। इस पुराणो में 4 हजार श्लोक हैं, जिनमे जीवन, मृत्यु, खानपान, रहन सहन और सत्यतम व रमोगुण की व्याख्या की गई है। इन पुराणों की रचना महाभारत के बाद कृष्णद्रुपद व्यास में की गई थी। बिबेक ने महाभारत, वाल्मीकि रामायण एवं भागवत महापुराण का अंग्रेजी में अनुवाद किया है। वे इस समय सभी 18 महापुराण पर कार्य कर रहे है और अब तक इनमें से 6 पूर्ण हो गई है।

जेएलएफ के दौरान बैठक में हुए ब्रह्मापुराण सत्र में साहित्यकार बिबेक देबरॉय ने जेएनयू के रिटायर्ड प्रोफेसर पुष्पेश पंत के साथ चर्चा की।

बॉलीवुड की बुनियाद सेशन में वरिष्ठ फिल्म समीक्षक और पत्रकार अजीत राय और दैनिक भास्कर के नेशनल एडिटर लक्ष्मीप्रसाद पंत ने चर्चा की। शाहरुख खान की पठान फिल्म के विवाद पर बोलते हुए अजीत राय ने कहा कि इस समय पठान फिल्म का विरोध नहीं हो रहा है, अभी लोग शाहरुख का विरोध कर रहे है, यह विरोध इसलिए भी हो रहा है, क्योंकि शाहरुख मुस्लिम है। अगर वे मुस्लिम नहीं होते तो यह विरोध नहीं होता। यह मैन्यूफैक्वर प्रोटेस्ट है, जिसका समर्थन मैं नहीं करता। मैं निजी रूप से फिल्म क्रिटिक के रूप में फिल्म सेंसरशिप या किसी भी तरह की सेंसरशिप को नहीं मानता। दुनियाभर में क्रिएटिव सेंसरशिप कहीं नहीं है। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड का कोई क्रिएटिव माइंडसेट नहीं है, यही कारण है कि बॉलीवुड पिछड़ता जा रहा है।

यह सही है कि यहां सबसे कम पैसा लेखन और क्रिएटिव माइंडसेट पर खर्च किया जाता है। वैसे हम दुनियाभर में फिल्म बिजनेस की बात करें तो यूरोपियन मार्केट के मुकाबले हमारा जीडीपी 0.5 प्रतिशत है। बॉलीवुड पूरी इंडस्ट्री पांच हजार करोड़ रुपए की है, इससे बड़ी तो टीवी और न्यूज इंडस्ट्री है। टीवी लगभग 80 हजार करोड रुपए का मार्केट है। हमारी फिल्मों से ज्यादा जूतों का मार्केट है, यह भी 56 हजार करोड़ का है। बॉलीवुड में सलेक्शन सबसे बड़ी समस्या है, क्या करना चाहिए, इस पर ध्यान नहीं दिया जाता। पहले की बात करें तो हमारी इंडस्ट्री पूरी दुनिया में दिखाई जाती थी, संगम जैसी फिल्में कई देशों में तीन साल तक चली। इसलिए इसे बॉलीवुड नाम दिया गया। आज यह बॉलीवुड नहीं है। हॉलीवुड में एक फिल्म 2000 करोड़ में बनती है और 5000 करोड़ तक कमाती है, ऐसे में उनकी एक फिल्म हमारी पूरी इंडस्ट्री के बराबर है।

फेस्टिवल के 16वें संस्करण में 21 भारतीय और 14 अंतर्राष्ट्रीय भाषाएं प्रस्तुत की जाएंगी। जेएलएफ में इस बार 350 स्पीकर हिस्सा लेंगे। स्पीकर्स और पैनलिस्टों में ‘टॉम्ब ऑफ सैंड’ के लिए पिछले साल के अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता गीतांजलि, बुकर विजेता बर्नार्डिन एवरिस्टो के साथ गुलजार, पंडित हरिप्रसाद चौरसिया, शोभा डे, शबाना आजमी, जावेद अख्तर, शशि थरूर, आंचल मल्होत्रा, अमीष त्रिपाठी, सुधा मूर्ति, अश्विन सांघी, फिल्म निर्माता ओनिर, नोबेल पुरस्कार विजेता अब्दुलराजक गुरनाह और भारतीय खुफिया ब्यूरो के पूर्व विशेष निदेशक अमरजीत सिंह दुलत जैसे जाने-माने चेहरे शामिल रहेंगे।

By VASHISHTHA VANI

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