सिंगर-एक्टरा से राजनेता बने सिद्धू मूसेवाला की गैंगस्टरों द्वारा गोलियों से निर्मम हत्या करने की घटना राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था का पर्दाफाश करती है। वहीं मूसेवाला की हत्या पंजाब में फल-फूल रही गैंगस्टर संस्कृति की डरावनी तस्वीर भी पेश करती है। वहीं हाल ही के वर्षों में गैंगस्टरों द्वारा बिना किसी डर के अपने घातक इरादों को अंजाम देने से पैदा हुए संकट को भी दर्शाती है। पंजाब में सत्ता परिवर्तन के बाद से कानून व्यवस्था के मोर्चे पर नित नई चुनौती पेश आ रही हैं, और विडंबना यह है कि प्रदेश सरकार कागजी कार्रवाई और बयानबाजी से आगे बढ़ नहीं पा रही है।

Advertisement

मशहूर युवा गायक सिद्धू मूसेवाला की बीती 29 मई को मानसा जिले के जवाहरके गांव में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। ये हत्याकांड तब हुआ है जब पंजाब सरकार ने दो दिन पहले ही मूसेवाला समेत 424 वीआईपी लोगों की सुरक्षा वापस ले ली थी। पंजाब सरकार इस हत्याकांड के बाद जरूर एक्टिव हुई हो, लेकिन राज्य में सरकार के गठन के ढाई महीने के भीतर कई हत्याओं ने कानून-व्यवस्था के मोर्च पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

सिद्धू मूसेवाला की हत्या में पंजाब पुलिस प्रथम दृष्टया दो कुख्यात गिरोहों की प्रतिद्वंद्विता को जिम्मेदार मानकर चल रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मूसेवाल की हत्या की साजिश दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद गैंगस्टरों ने रची है। यह भी दावा किया जा रहा है कि हत्या के तार वर्ष 2021 में एक युवा अकाली नेता की हत्या से जुड़े हो सकते हैं, जिसके प्रतिशोध के चलते ही इस हत्या को अंजाम दिया गया होगा। यहां उस दुर्दांत गैंगस्टर की कारगुजारियों की जांच की जरूरत महसूस की जा रही है जो जेल की सलाखों के पीछे से गंभीर वारदातों को अंजाम देता रहा है। बताया जाता है कि वह भारत व विदेशों में स्थित भारत विरोधी ताकतों के हाथ में खेल सकता है जो दरअसल, पंजाब में गड़बड़ी फैलाना चाहते हैं। यही वजह है कि पुलिस इस कांड में विदेशी हाथ की दिशा में भी जांच में जुटी है।

पंजाब विधानसभा चुनाव के नतीजों के दो दिन बाद ही फिरोजपुर में एक दलित कांग्रेस कार्यकर्ता की पिटाई हुई थी। इसका आरोप आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर लगा था। हमले के करीब दो हफ्ते बाद 29 मार्च को कार्यकर्ता इकबाल सिंह की अस्पताल में मौत हो गई थी। इकबाल सिंह की मौत के बाद कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू उनके परिवार से मिले थे और भगवंत मान सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने इस हत्या के लिए सीधे-सीधे आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया था। गुरदासपुर के फुलरा गांव में 4 अप्रैल को खुलेआम गोलीबारी हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जमीन विवाद के कारण ये गोलीबारी दो गुटों में हुई थी। जिसमें सरपंच के पति सुखराज सिंह समेत चार लोगों की मौत हो गई थी। 6 अप्रैल को पटियाला में एक यूनिवर्सिटी के बाहर कबड्डी खिलाड़ी धरमिंदर सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने बताया था कि धरमिंदर को आपसी दुश्मनी के कारण गोली मारी गई थी। अमृतसर के नांगली गांव में 25 अप्रैल की रात 12वीं के एक छात्र की गोली मारकर हत्या की गई थी। पुलिस ने बताया था कि 17 साल के विजय सिंह को उसके दो दोस्तों ने ही गोली मारी थी। पंजाब के मोहाली में इंटेलिजेंस दफ्तर पर हुए आरपीजी अटैक का मामला अभी ठंडा नहीं हुआ है।

बीती तेरह मई की एक खबर के अनुसार पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गायक कलाकारों को बंदूक और नशा संस्कृति प्रमोट न करने का आह्वान किया था। गायकों को आज की युवा पीढ़ी अपना रोल मॉडल मानती है। मान ने उन्हें पंजाब की संस्कृति को प्रमोट करने की अपील की। भगवंत मान ने कहा कि यदि ऐसा न किया गया तो सरकार सख्ती भी करेगी। मुख्यमंत्री ने ऐसी अपील पुलिस अधिकारियों से मिले फीडबैक के आधार पर की है। उसका मानना है कि भड़काऊ गीतों की वजह से पंजाब में हथियारों और नशे का चलन बढ़ रहा है। समय-समय पर पुलिस द्वारा चलाये गये अभियानों में कुछ गैंगस्टर मारे गये, वहीं आपसी प्रतिद्वंद्विता के चलते भी कई अपराधी मारे जा चुके हैं। लेकिन उनके नक्शेकदम पर चलने वाले दूसरे अपराधी इन गिरोहों में में शामिल हो जाते हैं दरअसल ये अपराधी तत्व हत्या, जबरन वसूली, हथियारों की तस्करी और मादक पदार्थों की खरीद-फरोख्त जैसे गैर-कानूनी कार्यों में लिप्त रहते हैं। विभिन्न प्रकार के अपराधों को अंजाम देने वाले अपराधियों का गठजोड़ स्थिति को गंभीर बना रहा है।

राज्य के मुख्यमंत्री का दायित्व संभालने के कुछ समय बाद ही मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस उद्देश्य से लक्ष्य के लिये समर्पित विशेष पुलिस इकाई के गठन के आदेश भी दिये थे। दरअसल, राज्य में एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स को एक कठिन चुनौती का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि राज्य में पांच सौ से अधिक सदस्यों वाले करीब सत्तर गिरोह आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहे हैं, जिनमें से करीब तीन सौ गुर्गे विभिन्न जेलों में बंद हैं। लेकिन यदि अपराधी जेल के भीतर रहकर भी अपराधों को अंजाम देने में कामयाब हो जाते हैं तो यह पंजाब व अन्य राज्यों के जेल अधिकारियों की लापरवाही को ही उजागर करता है। जिसके चलते गिरोह के सदस्य बंदूक संस्कृति का सोशल मीडिया के जरिये महिमामंडन में लगे रहते हैं। जिसका मकसद अपने गिरोहों में भटके हुए नये युवाओं को शामिल करना होता है। इस बात के तमाम सबूत कानून प्रवर्तन एजेंसियों को मिले भी हैं।

इस चुनौती से मुकाबले के लिये पुलिस व अन्य खुफिया एजेंसियों को मिलकर काम करने की जरूरत है। इसके लिये अन्य राज्यों की पुलिस से बेहतर तालमेल करने की जरूरत है। वहीं पंजाब में गैंगस्टरों के खतरे को देखते हुए पार्टी स्तर से ऊपर उठकर दृढ़ राजनीतिक इच्छा शक्ति दिखाने की भी जरूरत है। इस कार्य में केंद्र सरकार की भी मदद ली जानी चाहिए ताकि दूसरे देशों में सक्रिय पंजाब के गैंगस्टरों के प्रत्यर्पण के लिये दूसरे देशों पर दबाव बनाया जा सके। मूसेवाल की हत्या को लेकर राजनीतिक टिप्पणियां सामने आई हैं। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की सरकार की इस बात को लेकर आलोचना की जा रही है कि उसने हमले के आसन्न खतरे को नजरअंदाज करके सिद्धू मूसेवाला की सुरक्षा में कटौती की थी। कहा जा रहा है कि गैंगस्टरों द्वारा पेश की गई चुनौती की व्यापकता का आकलन करने में राज्य सरकार पूरी तरह से विफल रही है।

पंजाब की भगवंत मान सरकार ने दो दिन पहले सभी वीआईपी लोगों से सरकारी पुलिस सुरक्षा हटाकर आम जनता के लिए उसे प्रयोग करने का ऐलान किया था। विपक्षी दलों ने इस हमले को लेकर मान सरकार की आलोचना की है। मुख्यमंत्री ने दोषियों को न बख्शने का ऐलान किया है। सरकार को तुरंत सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों से समस्या दूर होने के बजाय अधिक उलझ सकती है। राज्य की पहली प्राथमिकता शांति व स्थिरता कायम करने की होनी चाहिए। पंजाब में खालिस्तान की मांग के चलते कितने काले दिन देखे हैं, ये किसी से छिपा नहीं है।

सभी राजनीतिक दलों और जनमानस का यही प्रयास हो कि ऐसी स्थितियां राज्य की जनता को फिर से न देखनी पड़ें। हमें हमेशा याद रखना होगा कि पंजाब की सीमा हमारे दुश्मन मुल्क पाकिस्तान से लगती है, और वो कभी नहीं चाहता है कि भारत में शांति का माहौल रहे। ऐसे में अंदरूनी शरारती तत्वों की साथ ही साथ बाहरी दुश्मनों से भी लड़ने की दोहरी चुनौती पंजाब सरकार के सामने है। ऐसे में अधिक सक्रियता, सख्ती और सूझबूझ से प्रदेश में विकास की गाड़ी को आगे बढ़ाया जा सकता है।

-लेखक राज्य मुख्यालय पर मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Previous post आयकर विभाग ने एशियन ग्रैनिटो के कई परिसरों पर की छापेमारी
Next post अनाथ बच्चों के लिये मोदी की संवेदनशील पहल