महँगाई ने निम्न, मध्यम तथा उच्च मध्यम परिवारों के घर के बजट का बंटाढार दिया है। यानि घर का बजट कितनी ही सावधानी से बना लें। यह हर महीने डेफिसिट के साथ ही बंद होता है। जबकि अल्प आय वर्ग वाले परिवारों के सामने तो और भी गम्भीर संकट खड़ा हो गया है। सरकार की तरफ से जारी किए आँकड़ों ने तो सब को चौंका ही दिया है।

हर आदमी की जुबान पर महँगाई की बात हावी हो गई है। यद्यपि महँगाई का असर यूक्रेन युद्ध के कारण विश्वव्यापी है। और हमारे देश के लिए यह बहुत भारी पड़ने वाला है।

अप्रैल महीने में थोक महँगाई दर 15.08 प्र.श. पर पहुँच गई, जो एक रिकॉर्ड है। 24 साल बाद थोक महँगाई दर इस स्तर पर पहुँची है, जिससे देश के अर्थशास्त्रियों सहित हर आम नागरिक चौंक गया है। मार्च महीने में थोक महँगाई दर 14.55 प्र.श. पर थी। पिछले सालों की तुलना में अप्रैल में गत एक साल में महँगाई बेतहाशा बढ़ी है। उस पर लगाम ही नहीं लग रही। आम आदमी को इससे जीवन यापन में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि इस दरम्यान आय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।

पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दामों में हुई बेतहाशा वृद्धि ने महँगाई की आग में घी झौंकने का काम किया है। इन चीजों के दाम बढ़ने से ही हर चीज महँगी स्वतः ही हो जाती हैं। खाद्य पदार्थो के साथ सब्जियों के दाम भी बढ़े हैं। क्योंकि परिवहन और खाना पकाने में ये चीजें हर घर में काम आती है। इसी कारण हर घर पर महँगाई की मार पड़ रही है। बचत के चक्कर में खानपान पर भी असर पड़ रहा है। खासकर बच्चों के पौष्टिक आहार पर।

सरकारी आँकड़ों के अनुसार खुदरा महँगाई दर लगातार चौथे महीनें रिजर्व बैंक के मुद्रा स्फीति लक्ष्य से ऊपर है और इसी बात ने अर्थ शास्त्रियों को भी चिंतित किया है। इसके लिए रुपये की बिगड़ती सेहत भी कम जिम्मेदार नहीं है। विदेशी पूंजी की निकासी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की ऊँची कीमतों से रुपया प्रभावित हुआ है। यही सब कारण हैं जो आम आदमी का तेल निकाल ही नहीं रहे बल्कि निचोड़ रहे हैं। केंद्र सरकार ने गेहूँ के निर्यात पर रोक लगाकर महँगाई को थामने का प्रयास किया है, मगर उसका असर तत्काल होता दिख नहीं रहा।

केंद्र सरकार को महँगाई पर लगाम लगाने के लिए फिर से नीतियों पर मंथन करना बहुत जरूरी है अन्यथा महँगाई आदमी को मजबूर कर देगी। यह महँगाई सभी सामानों पर एक साथ और एक जैसा ही असर डाल रही है। जबकि हमें याद है “केवल प्याज की महँगाई के कारण पूर्व में सरकारों की बलि चढते हुए भी हमने देखी हैं।” केन्द्र व राज्य सरकारों को मिलकर इसकी रोकथाम के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है।

कोरोना के कारण बी.पी.एल. परिवारों को खाद्य सामग्री करीब दो वर्ष से मुफ्त वितरित की जा रही है। यह कठिन समय में सरकार का दायित्व था, जिसे बखूबी निभाया भी गया। अब कोरोना का असर नाममात्र का रह गया है और कामगारों को काम भी मिलने लग गए हैं। ऐसी हालत में इस योजना पर पुनर्विचार करना समीचीन होगा। अब इस पर रोक लगा देनी चाहिए। ताकि इस पर होने वाले खर्च को बचाकर, पेट्रोलियम पदार्थों पर बढ रही बेतहाशा बढोतरी को रोका जा सके। साथ ही ऐसे अन्य खर्चों पर कड़ाई से लगाम लगाई जावे। अन्यथा जनता के साथ साथ सरकारों पर भी महँगाई अपना असर अविलम्ब दिखा देगी।

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